Memories

जिसको आज मुझमे हजारो गलतिया नजर आती हैं कभी उसी ने कहा था तुम जैसे भी हो मेरे हो


कमाल की मोहब्बत थी मुझसे उसको अचानक ही शुरू हुई और बिना बताये ही ख़त्म हो गई


मैं बैठूंगी जरूर महफ़िल में मगर पियूँगी नहीं क्योंकि मेरा गम मिटा दे इतनी शराब की औकात नहीं


मेरी गलती बस यही थी के मैंने हर किसी को खुद से ज़्यादा जरुरी समझा

उस मोड़ से शुरू करनी है फिर से जिंदगी जहा सारा शहर अपना था और तुम अजनबी

अपनी तन्हाई में तनहा ही अच्छी हूँ मुझे ज़रूरत नहीं दो पल के सहारो की

जिंदगी से सिकवा नहीं की उसने गम का आदी बना दिया गिला तो उनसे है जिन्होंने रौशनी की उम्मीद दिखा के दीया ही बुझा दिया

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